bundi rajasthan ka itihas

बूंदी राजस्थान का इतिहास, bundi history and culture

bundi rajasthan ka itihas, राजस्थान का इतिहास, bundi fort history and culture festivals, राजस्थान का इतिहास प्रारम्भ से ही गौरवशाली रहा हे। और इस गौरवशाली परम्परा का एक अद्धभूत इतिहासिक क्षेत्र बूंदी रहा हे. जिसकी भावी स्थापत्ये कला और  वीरता वे साहस का परिचायक  तारागढ़ का किला इस गौरवशाली परम्परा  में चार चाँद लगता हे। बूंदी के आसपास का क्षेत्र ( कोटा ,बूंदी ,झालावाड़ ,बारां ) हाड़ौती क्षेत्र   कहलाता हे।

यहाँ के विख्यात कवि सूर्येमल मिश्रण दुवारा रचित “वंशभास्कर” में इस क्षेत्र के बारे में सम्पूर्ण उल्लेख मिलता हे। हाड़ौती क्षेत्र में महाभारत के समय  से ही मीणा जाति निवास करती हे।  मध्यकाल में यहां मीणा जाति का राज्य था।  पूर्व में हाड़ोती का सम्पूर्ण क्षेत्र बूंदी के अंतर्गत आता था |

bundi rajasthan ka itihas

बूंदी राजस्थान का इतिहास

छोटी काशी के नाम से प्रशिद्ध , बूंदी का यहे नाम वहां के शासक बूंदा मीणा के नाम पर पड़ा।  1342 ई. में हाडा चौहान देवा (नाडौल के चौहानो का राजवंश ) ने मीणो को पराजित कर बूंदी में चौहानो का  राजवंश  स्थापित किया। कालान्तर में यहां फिर से  मेवाड़ के शासक क्षेत्र सिंह ने बूंदी को अपने अधीन कर लिया। 1567 ई.में  यहां के शाशक सुजान सिंह हाडा ने अकबर से संधि कर मुग़ल अधीनता स्वीकार कर ली और तब से बूंदी मेवाड़ से मुक्त हो गया। bundi rajasthan ka itihas

बूंदी का किला तारागढ़  और उसका इतिहास

अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे बूंदी नगरी और उसकी सुरक्षा के सहज पेहरी तारागढ़ दुर्ग का लगभग सात सो वर्षो का अतीत शानदार और गौरवशाली रहा हे। गिरी दुर्ग का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण हे। सुदृढ़ और ऊँची प्राचीर विशाल प्रवेशदुवर ,तथा अतुल्ये जलराशि से परिपूर्ण तालाब ऐसा  सोन्दर्ये प्रस्तुत  करते हे की देखते ही बनता है। इतिहासकारो के अनुसार राव देवा के वंशज राव बरसिंह  ने  मेवाड़ ,मालवा और गुजरात के आक्रमणों से सुरक्षा हेतु बूंदी के अरावली पर्वत शिखर पर एक विशाल दुर्ग का निर्माण कराया जो तारागढ़ के नाम से जाना जाता हे। बूंदी राजस्थान का इतिहास-bundi fort history,culture,festivals

बूंदी की स्थाप्तये कला

यहां की  स्थाप्तये कला आम्बेर ( पूर्व कछवाहा राजवंश ) से मिलता जुलता हे। लगभग 1426 फीट  की ऊंचाई पर बना ये दुर्ग पांच मील के क्षेत्रफल में फैला हुआ हे। कर्नल जेम्स टॉड (एनल्स एंड एंटिकुटी ऑफ़ राजस्थान ) ने इस दुर्ग की भव्यता और सोन्दर्ये पर मुग्ध होकर रजवाड़ो के महलों में बूंदी के राजमहल को सर्वश्रेष्ठ बताया हे।

अपने निर्माताओं के नाम के आधार पर इन महलो का नाम। छत्र – महल ,अनिरुद्ध महल ,रतन महल ,बदल महल ,फूल  महल बूंदी के महलो में कला और अनमोल खजाना विधमान हे महाराव उम्मेद सिंह के शासन काल में  बूंदी चित्रशाला (रंगविलास ) बूंदी चत्रकला का उत्कृष्ट उदहारण हे

बूंदी की स्थाप्तये कला

इस के अलावा यहां हाथी पोल ,गणेश पोल , हजारी पोल दुर्ग के प्रमुख दुवार हे। हाथी पोल के दोनों और हाथियों की दो विशाल पाषाण प्रतिमा हे. महाराव बुध सिंह ने बूंदी के चारो और प्राचीर का निर्माण करवाया। इसके अलावा चौरासी खम्बो की छतरी , शिकार बुर्ज ,फूल सागर ,जेतसागर ,नवलसागर ,  ये तालाब बूंदी की विगत वैभव की झलक प्रस्तुत करते हे।

बूंदी की स्थाप्तये कला

मराठो और मेवाड़ दुवारा पदाक्रांत होने के अलावा बूंदी पे कुछ आरसे तक कोटा के महाराव भीमसिंघ का भी अधिकार रहा। अंततः बूंदी राजये अंग्रेजो के अधीन हो गया और आजादी तक रहा।

बूंदी राजस्थान आर्ट एंड कल्चर एंड फेस्टिवल

यहां  की चित्रकला विश्व प्रसिद्ध हे। राव भवसिंह का शासन काल इस शैली का स्वर्ण काल माना जाता हे।  राजस्थान  में पशु – पक्षी का सर्वाधिक चत्रण इसी शैली में हुआ हे। मयूर ,हाथी ,तोते इस शैली के प्रमुख चित्र हे।

बूंदी राजस्थान आर्ट एंड कल्चर एंड फेस्टिवल

तीज महोत्सव बूंदी

छोटी  काशी के नाम से प्रशिद्ध बूंदी जिला  अपनी  अनुपम संस्कृति के लिए दुनिया भर में जाना जाता हे।  बूंदी में श्रावण मास में कजली तीज बड़ी धूम धाम से मनाई जाती हे। यहां की तीज मेला वे तीज सवारी मशहूर हे।  ” तीज त्यौहार बावड़ी ,ले डूबी गणगौर ” अर्थार्त तीज से गणगौर तक राजस्थान के अधिकांश त्यौहार मनाये जाते हे।

बूंदी तीज महोत्सव

बूंदी तीज महोत्सव 

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